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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:53 PMIST
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कृष्णाय वासुदेवाय

श्री कृष्ण · बुधवार

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥

krishnaya vasudevaya haraye paramatmane |
pranatakleshanashaya govindaya namo namah ||

अर्थ

श्री कृष्ण, वासुदेव, हरि, परमात्मा, शरण में आए लोगों के कष्ट मिटाने वाले गोविंद को बार-बार नमस्कार।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

संकट के समय और रोज़ की पूजा में यह श्लोक बोला जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पीला, मोरपंखी रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और श्री कृष्ण का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; बुधवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
  6. जाप के बाद माखन-मिश्री जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

कृष्णाय वासुदेवाय कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से बुधवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

कृष्णाय वासुदेवाय कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।

कृष्णाय वासुदेवाय का अर्थ क्या है?

श्री कृष्ण, वासुदेव, हरि, परमात्मा, शरण में आए लोगों के कष्ट मिटाने वाले गोविंद को बार-बार नमस्कार।

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