महामृत्युंजय मंत्र
भगवान शिव · सोमवार
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
Om tryambakam yajamahe sugandhim pushtivardhanam |
urvarukamiva bandhananmrityormukshiya mamritat ||
अर्थ
हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और पोषण बढ़ाने वाले शिव की पूजा करते हैं। जैसे पका ककड़ी का फल बेल से अपने आप अलग हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमरता से नहीं।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
रोग, भय और संकट के समय इसका जाप विशेष माना जाता है। यह ऋग्वेद का मंत्र है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; सफ़ेद, हल्का नीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और भगवान शिव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; सोमवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद दूध जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
महामृत्युंजय मंत्र कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से सोमवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
महामृत्युंजय मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है?
हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और पोषण बढ़ाने वाले शिव की पूजा करते हैं। जैसे पका ककड़ी का फल बेल से अपने आप अलग हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमरता से नहीं।
