परिचय
माँ सरस्वती के ध्यान और वंदना के प्रसिद्ध श्लोक, जो स्कूलों में भी गाए जाते हैं।
महत्व
पढ़ाई शुरू करने से पहले और वसंत पंचमी पर।
माँ सरस्वती · स्तोत्र
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥१॥
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालां दधाना
हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण।
भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना
सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना ॥२॥
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥१॥
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालां दधाना
हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण।
भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना
सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना ॥२॥
सुरासुरसेवितपादपङ्कजा
करे विराजत्कमनीयपुस्तका।
विरिञ्चिपत्नी कमलासनस्थिता
सरस्वती नृत्यतु वाचि मे सदा ॥३॥
सरस्वती सरसिजकेसरप्रभा
तपस्विनी सितकमलासनप्रिया।
घनस्तनी कमलविलोललोचना
मनस्विनी भवतु वरप्रसादिनी ॥४॥
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥५॥
माँ सरस्वती के ध्यान और वंदना के प्रसिद्ध श्लोक, जो स्कूलों में भी गाए जाते हैं।
पढ़ाई शुरू करने से पहले और वसंत पंचमी पर।