पंचक और भद्रा का समय
आने वाले दिनों में पंचक और भद्रा कब से कब तक है, दिल्ली के समय से।
पंचक
| शुरू | समाप्त | प्रकार |
|---|---|---|
| 17 नवंबर, 3:30 PM | 22 नवंबर, 5:54 AM | अग्नि पंचक |
| 14 दिसंबर, 10:35 PM | 19 दिसंबर, 3:58 PM | राज पंचक |
| 11 जनवरी, 4:34 AM | 15 जनवरी, 11:51 PM | राज पंचक |
| 7 फ़रवरी, 10:36 AM | 12 फ़रवरी, 5:41 AM | रोग पंचक |
जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में (धनिष्ठा के तीसरे चरण से रेवती तक) होता है, उस लगभग पाँच दिन के समय को पंचक कहते हैं। परंपरा में पंचक में दक्षिण दिशा की यात्रा, लकड़ी इकट्ठा करना, छत डालना, चारपाई बनवाना और कुछ संस्कार टालने की सलाह दी जाती है। पंचक किस दिन शुरू होता है, उससे उसका नाम पड़ता है; बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाला पंचक दोषरहित माना जाता है।
भद्रा (विष्टि करण)
| शुरू | समाप्त | भद्रा का वास |
|---|---|---|
| 3 नवंबर, 11:26 PM | 4 नवंबर, 11:03 AM | पृथ्वी |
| 7 नवंबर, 10:48 AM | 7 नवंबर, 11:05 PM | पाताल |
| 13 नवंबर, 7:24 AM | 13 नवंबर, 8:42 PM | पाताल |
| 17 नवंबर, 4:19 AM | 17 नवंबर, 5:17 PM | पाताल |
| 20 नवंबर, 7:01 PM | 21 नवंबर, 6:31 AM | पृथ्वी |
| 23 नवंबर, 11:43 PM | 24 नवंबर, 10:06 AM | स्वर्ग |
| 26 नवंबर, 11:31 PM | 27 नवंबर, 9:49 AM | स्वर्ग |
| 30 नवंबर, 1:46 AM | 30 नवंबर, 12:54 PM | पृथ्वी |
तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं; विष्टि करण को ही भद्रा कहा जाता है। परंपरा में भद्रा में शुभ और मांगलिक काम शुरू नहीं किए जाते; रक्षाबंधन और होलिका दहन में भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। मान्यता है कि जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन में हो तो भद्रा पृथ्वी पर रहती है और अधिक अशुभ मानी जाती है; स्वर्ग या पाताल की भद्रा का प्रभाव कम माना जाता है।
