॥ श्री गणेशाय नमः ॥
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शरद पूर्णिमा

अगली बार: रविवार, 25 अक्टूबर 2026 (8 दिन बाद)

आश्विन पूर्णिमा की रात चाँदनी में खीर रखने की परंपरा है। इस रात माँ लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है।

शुभ मुहूर्त: रविवार, 25 अक्टूबर 2026

पूर्णिमा तिथि11:56 AM से 26 अक्टूबर, 9:41 AM
तिथि का आरंभ और समाप्ति
🌙 चंद्रोदय (चाँद निकलने का समय)4:56 PM
चंद्रोदय के बाद चाँद को अर्घ्य दें और खीर चाँदनी में रखें
कोजागरी लक्ष्मी पूजा (निशीथ काल)11:40 PM से 26 अक्टूबर, 12:31 AM
आधी रात का शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त11:42 AM से 12:27 PM
दिन का सबसे शुभ समय

इस समय पूजा शुरू न करें

राहुकाल4:17 PM से 5:42 PM
यमगंड12:05 PM से 1:29 PM

सूर्योदय 6:28 AM, सूर्यास्त 5:42 PM। समय दिल्ली के अनुसार है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें। स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

शरद पूर्णिमा की पूजा और खीर की परंपरा

  1. सुबह स्नान करके माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं।
  2. शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल या दूध से अर्घ्य दें।
  3. गाय के दूध, चावल और मिश्री से खीर बनाएँ। इसे जाली या पतले साफ़ कपड़े से ढककर छत या आँगन में चाँदनी में रखें।
  4. रात को निशीथ काल में माँ लक्ष्मी की पूजा करें। परंपरा है कि इस रात माँ लक्ष्मी पूछती हैं "को जागर्ति?" (कौन जाग रहा है?), इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा कहते हैं और भजन-कीर्तन के साथ जागरण किया जाता है।
  5. अगली सुबह खीर का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में परिवार में बाँटें।
  6. ब्रज में इस रात श्री कृष्ण के महारास की स्मृति में रास उत्सव मनाया जाता है।

पूजा सामग्री

  • खीर के लिए दूध, चावल, मिश्री, इलायची
  • चाँदी, काँसे या मिट्टी का बर्तन
  • जाली या पतला साफ़ कपड़ा
  • माँ लक्ष्मी का चित्र
  • घी का दीपक
  • रोली, अक्षत
  • सफ़ेद फूल / कमल
  • अर्घ्य के लिए जल या दूध

क्या न करें

  • खीर को खुला न छोड़ें; धूल और कीड़ों से बचाने के लिए जाली से ढकें।
  • दूध की चीज़ें गर्मी में देर तक बाहर रहने से ख़राब हो सकती हैं; खाने से पहले देख लें, बच्चों और बुज़ुर्गों का ख़ास ध्यान रखें।
  • राहुकाल में पूजा शुरू न करें।

यह सामान्य पूजा विधि है। अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।