दशहरा (विजयादशमी)
अगली बार: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 (3 दिन बाद)
आश्विन शुक्ल दशमी को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में दशहरा मनाया जाता है।
शुभ मुहूर्त: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
| दशमी तिथि | 12:50 PM से 21 अक्टूबर, 2:12 PM तिथि का आरंभ और समाप्ति |
|---|---|
| विजय मुहूर्त | 1:59 PM से 2:45 PM दिन का 11वाँ मुहूर्त, नए काम के लिए शुभ |
| अपराह्न पूजा (शमी / अपराजिता) | 1:14 PM से 3:30 PM दोपहर बाद का समय |
| रावण दहन | 5:46 PM (सूर्यास्त) के बाद प्रदोष काल में |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:43 AM से 12:28 PM दिन का सबसे शुभ समय |
इस समय पूजा शुरू न करें
| राहुकाल | 2:56 PM से 4:21 PM |
|---|---|
| यमगंड | 9:15 AM से 10:40 AM |
सूर्योदय 6:24 AM, सूर्यास्त 5:46 PM। समय दिल्ली के अनुसार है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें। स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
दशहरा पूजा की विधि
- सुबह स्नान करके भगवान श्री राम और माँ दुर्गा की पूजा करें।
- अपराह्न काल (दोपहर बाद) में अपराजिता देवी की पूजा करें: ज़मीन पर अष्टदल (आठ पंखुड़ियों वाला कमल) बनाकर अपराजिता के फूल अर्पित करें।
- इसी समय शमी वृक्ष की पूजा करें, उसकी जड़ में जल चढ़ाकर दीपक जलाएँ और शमी के पत्ते घर लाएँ।
- शस्त्र और औज़ार, वाहन, किताबें और काम की चीज़ें साफ़ करके उन पर तिलक लगाएँ (शस्त्र पूजा)।
- नवरात्रि में बोए गए जौ के अंकुर (जवारे) माँ को अर्पित करें; कई जगह इन्हें कान पर या पगड़ी में लगाने की परंपरा है।
- शाम को सूर्यास्त के बाद रावण दहन होता है। घर लौटकर बड़ों को प्रणाम करें और मिठाई बाँटें।
पूजा सामग्री
- अपराजिता के फूल
- शमी के पत्ते
- रोली, अक्षत, हल्दी
- दीपक, घी, धूप
- जवारे (जौ के अंकुर)
- मिठाई
- फूल माला
क्या न करें
- रावण दहन के समय बच्चों को आग और पटाखों से दूर रखें।
- शमी या पेड़ के पत्ते तोड़ते समय पेड़ को नुकसान न पहुँचाएँ; कुछ पत्ते ही लें।
- नया काम शुरू करना हो तो राहुकाल छोड़कर विजय मुहूर्त में करें।
यह सामान्य पूजा विधि है। अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।