॥ श्री गणेशाय नमः ॥
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करवा चौथ

अगली बार: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 (12 दिन बाद)

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को सुहागिन महिलाएँ पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और चंद्रोदय पर अर्घ्य देती हैं।

शुभ मुहूर्त: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

चतुर्थी तिथि1:07 AM से 10:10 PM
तिथि का आरंभ और समाप्ति
🌙 चंद्रोदय (चाँद निकलने का समय)8:12 PM
चाँद दिखने के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलें; क्षितिज पर पेड़-इमारत हों तो चाँद कुछ मिनट बाद दिखता है
पूजा मुहूर्त5:38 PM से 6:56 PM
सूर्यास्त के बाद, करवा माता की पूजा और कथा
व्रत का समय6:30 AM से 8:12 PM
सूर्योदय से चंद्रोदय तक
सरगी का समय4:54 AM से 6:06 AM
सूर्योदय से पहले
अभिजीत मुहूर्त11:42 AM से 12:27 PM
दिन का सबसे शुभ समय

इस समय पूजा शुरू न करें

राहुकाल1:28 PM से 2:51 PM
यमगंड6:30 AM से 7:54 AM

सूर्योदय 6:30 AM, सूर्यास्त 5:38 PM। समय दिल्ली के अनुसार है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें। स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

करवा चौथ व्रत और पूजा की विधि

  1. सूर्योदय से पहले सास की दी हुई सरगी (फल, मिठाई, मेवे, सेवइयाँ) खाकर पानी पिएँ और पति की लंबी आयु के लिए व्रत का संकल्प लें।
  2. दिन भर निर्जला व्रत रखा जाता है। स्वास्थ्य के अनुसार कई महिलाएँ फल या पानी लेकर भी व्रत रखती हैं।
  3. शाम को पूजा मुहूर्त में चौकी पर करवा माता का चित्र लगाएँ और शिव-पार्वती, श्री गणेश और कार्तिकेय जी की पूजा करें।
  4. मिट्टी या धातु के करवे में जल भरें, उस पर ढक्कन रखकर चावल या मिठाई रखें। रोली, अक्षत, सिंदूर और फूल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएँ।
  5. महिलाएँ मिलकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पूजा की थालियाँ आपस में घुमाती (फेरी) हैं।
  6. चंद्रोदय होने पर छलनी में दीपक रखकर चाँद देखें, करवे के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।
  7. पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें। बड़ों का आशीर्वाद लें और करवा व भेंट सास को दें।

पूजा सामग्री

  • मिट्टी या धातु का करवा (ढक्कन सहित)
  • छलनी
  • घी का दीपक
  • रोली, अक्षत, सिंदूर
  • कलावा
  • फूल
  • मिठाई और फल
  • सरगी की थाली
  • करवा माता का चित्र
  • जल का लोटा
  • सुहाग सामग्री

व्रत कथा (संक्षेप में)

एक साहूकार के सात बेटे और वीरवती नाम की एक बेटी थी। विवाह के बाद पहले करवा चौथ पर वीरवती मायके में थी और दिन भर के निर्जला व्रत से भूख-प्यास से व्याकुल हो गई।

भाइयों से बहन की हालत देखी न गई। उन्होंने पेड़ के पीछे दीपक जलाया और छलनी की आड़ से उसे नकली चाँद दिखा दिया। वीरवती ने अर्घ्य देकर व्रत खोल लिया, और तभी उसे पति के गंभीर रूप से बीमार होने का समाचार मिला।

दुखी वीरवती ने अपनी भूल के लिए क्षमा माँगी और पूरे वर्ष हर चतुर्थी का व्रत श्रद्धा से रखा। अगले करवा चौथ पर उसने पूरी विधि से व्रत किया, और करवा माता (माँ पार्वती) की कृपा से उसका पति फिर स्वस्थ हो गया।

इसीलिए करवा चौथ का व्रत सच्चा चाँद देखकर और अर्घ्य देकर ही खोला जाता है।

क्या न करें

  • चंद्रोदय से पहले व्रत न खोलें। बादल हों तो अपने शहर के चंद्रोदय समय के बाद चाँद की दिशा में अर्घ्य देने की परंपरा है।
  • गर्भवती, बीमार या नियमित दवा लेने वाली महिलाएँ डॉक्टर की सलाह से ही निर्जला व्रत रखें।
  • राहुकाल में पूजा शुरू न करें।
  • कई परिवारों में इस दिन काले या सफ़ेद कपड़े न पहनने की परंपरा है।

यह सामान्य पूजा विधि है। अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।