श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:49 PMIST
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सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये

माँ दुर्गा · शुक्रवार

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

sarvamangalamangalye shive sarvarthasadhike |
sharanye tryambake gauri narayani namo'stu te ||

अर्थ

हे सब मंगलों में मंगल करने वाली, कल्याणकारी, सब कामनाएँ पूरी करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी! तुम्हें नमस्कार है।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

देवी पूजा और आरती के बाद यह श्लोक बोलने की परंपरा है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और माँ दुर्गा का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शुक्रवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
  6. जाप के बाद लाल चुनरी जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शुक्रवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये का अर्थ क्या है?

हे सब मंगलों में मंगल करने वाली, कल्याणकारी, सब कामनाएँ पूरी करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी! तुम्हें नमस्कार है।

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