बृहस्पति मूल मंत्र
बृहस्पति देव · गुरुवार
ॐ बृं बृहस्पतये नमः ।
Om brim brihaspataye namah |
अर्थ
"बृं" बृहस्पति का बीज अक्षर है; देवगुरु बृहस्पति को नमस्कार।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
गुरुवार को पीले फूल और चने की दाल चढ़ाकर इसका जाप किया जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और बृहस्पति देव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; गुरुवार को इसका विशेष महत्व है।
- ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 19,000 बार (लगभग 176 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
- जाप के बाद चने की दाल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
बृहस्पति मूल मंत्र कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से गुरुवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
बृहस्पति मूल मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 19,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।
बृहस्पति मूल मंत्र का अर्थ क्या है?
"बृं" बृहस्पति का बीज अक्षर है; देवगुरु बृहस्पति को नमस्कार।
