श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:24 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
होम › मंत्र संग्रह › गुरुवार

गुरुवार: भगवान विष्णु, बृहस्पति देव की पूजा, मंत्र और व्रत कथा

गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है।

देवताभगवान विष्णु, बृहस्पति देव
शुभ रंगपीला
दानचने की दाल, हल्दी, केला, पीले वस्त्र

गुरुवार के मंत्र

भगवान विष्णु

वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

अर्थ: भगवान वासुदेव (विष्णु और श्री कृष्ण) को नमस्कार। इसमें बारह अक्षर हैं, इसलिए इसे द्वादशाक्षर मंत्र कहते हैं।

नारायण अष्टाक्षर मंत्र

ॐ नमो नारायणाय ।

अर्थ: भगवान नारायण को नमस्कार। इसमें आठ अक्षर हैं।

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

अर्थ: हम नारायण को जानें, वासुदेव का ध्यान करें; वे भगवान विष्णु हमें प्रेरित करें।

भगवान विष्णु के सभी 5 मंत्र →

बृहस्पति देव

गुरु बीज मंत्र

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः ।

अर्थ: ग्रां, ग्रीं, ग्रौं गुरु के बीज अक्षर हैं; इनके साथ गुरु देव को नमस्कार।

बृहस्पति मूल मंत्र

ॐ बृं बृहस्पतये नमः ।

अर्थ: "बृं" बृहस्पति का बीज अक्षर है; देवगुरु बृहस्पति को नमस्कार।

गुरुवार की पूजा विधि

  1. स्नान करके पीले वस्त्र पहनें।
  2. भगवान विष्णु को पीले फूल, चने की दाल, गुड़, हल्दी और केले अर्पित करें।
  3. केले के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएँ और हल्दी-चने की दाल अर्पित करें।
  4. गुरुवार व्रत कथा पढ़ें और "ॐ जय जगदीश हरे" आरती करें।
  5. दिन में एक बार पीला भोजन (जैसे चने की दाल, बेसन) करें।

क्या करें

  • पीले वस्त्र पहनें, केले के पेड़ की पूजा करें।
  • गुरु, शिक्षक और बड़ों का आदर करें।
  • चने की दाल और हल्दी का दान करें।

क्या न करें

  • परंपरा में गुरुवार को बाल धोने, बाल-नाखून काटने और घर में पोंछा लगाने से बचने की मान्यता है।
  • इस दिन केला नहीं खाया जाता (केले के पेड़ की पूजा होती है)।

गुरुवार व्रत कथा

एक प्रतापी राजा था, जो खूब दान-पुण्य करता था। पर रानी को दान करना पसंद नहीं था; उसे लगता था कि इससे धन घटता है।

एक गुरुवार बृहस्पति देव साधु का वेश धरकर भिक्षा माँगने आए। रानी ने कहा कि ऐसा उपाय बताओ जिससे हमारा सारा धन खत्म हो जाए और दान का झंझट ही न रहे। साधु ने कहा: गुरुवार को घर लीपना, बाल धोना, कपड़े धोना शुरू कर दो, धन अपने आप चला जाएगा।

रानी ने ऐसा ही किया। कुछ ही समय में घर का धन नष्ट हो गया, राजा को परदेस जाना पड़ा और रानी भूखी रहने लगी। तब रानी अपनी बहन के घर गई। बहन ने उसे गुरुवार व्रत की विधि बताई: पीले वस्त्र पहनना, केले के पेड़ की पूजा, चने की दाल और गुड़ का भोग, कथा सुनना और एक समय पीला भोजन।

रानी ने श्रद्धा से व्रत किया और अपनी भूल के लिए क्षमा माँगी। धीरे-धीरे घर फिर से धन-धान्य से भर गया, राजा लौट आया, और रानी ने दान-पुण्य करना सीख लिया।

यह पारंपरिक लोक कथा का रामकृपा द्वारा अपने शब्दों में लिखा सार है।

सवाल-जवाब

गुरुवार को किस भगवान की पूजा होती है?

गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन है। इस दिन केले के पेड़ और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

गुरुवार व्रत कितने करने चाहिए?

परंपरा में 16 गुरुवार का संकल्प लिया जाता है। पौष महीने में यह व्रत शुरू नहीं करते, ऐसी मान्यता है।

हर गुरुवार याद दिलाने के लिए

रामकृपा का WhatsApp चैनल फ़ॉलो करें: रोज़ का मंत्र, पंचांग और त्योहार।