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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:45 PMIST
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गुरु नवग्रह मंत्र (पौराणिक)

बृहस्पति देव · गुरुवार

देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम् ।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् ॥

devanam cha rishinam cha gurum kanchanasannibham |
buddhibhutam trilokesham tam namami brihaspatim ||

अर्थ

देवताओं और ऋषियों के गुरु, सोने जैसे चमकते, बुद्धि के स्वरूप, तीनों लोकों के स्वामी बृहस्पति को मैं नमस्कार करता हूँ।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

नवग्रह शांति के पाठ में गुरु के लिए यही श्लोक पढ़ा जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और बृहस्पति देव का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; गुरुवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 19,000 बार (लगभग 176 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
  6. जाप के बाद चने की दाल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

गुरु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से गुरुवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

गुरु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 19,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।

गुरु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?

देवताओं और ऋषियों के गुरु, सोने जैसे चमकते, बुद्धि के स्वरूप, तीनों लोकों के स्वामी बृहस्पति को मैं नमस्कार करता हूँ।

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