श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:42 PMIST
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भगवान विष्णु के मंत्र

गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन है। एकादशी भी भगवान विष्णु को समर्पित है।

वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

अर्थ: भगवान वासुदेव (विष्णु और श्री कृष्ण) को नमस्कार। इसमें बारह अक्षर हैं, इसलिए इसे द्वादशाक्षर मंत्र कहते हैं।

नारायण अष्टाक्षर मंत्र

ॐ नमो नारायणाय ।

अर्थ: भगवान नारायण को नमस्कार। इसमें आठ अक्षर हैं।

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

अर्थ: हम नारायण को जानें, वासुदेव का ध्यान करें; वे भगवान विष्णु हमें प्रेरित करें।

शान्ताकारं (विष्णु ध्यान)

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

अर्थ: शांत रूप वाले, शेषनाग पर लेटे, नाभि में कमल वाले, देवताओं के स्वामी, विश्व के आधार, आकाश जैसे व्यापक, बादल जैसे श्याम, सुंदर अंगों वाले, लक्ष्मी पति, कमल नयन, योगियों के ध्यान में आने वाले, संसार का भय हरने वाले, सब लोकों के एकमात्र स्वामी भगवान विष्णु की मैं वंदना करता हूँ।

मङ्गलम् भगवान विष्णुः

मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः ।
मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मङ्गलायतनो हरिः ॥

अर्थ: भगवान विष्णु मंगलमय हैं, गरुड़ ध्वज वाले मंगलमय हैं, कमल नयन मंगलमय हैं, श्री हरि मंगल के धाम हैं।