शनि बीज मंत्र
शनि देव · शनिवार
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ।
Om pram prim praum sah shanaishcharaya namah |
अर्थ
प्रां, प्रीं, प्रौं शनि के बीज अक्षर हैं; इनके साथ शनि देव को नमस्कार।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
साढ़ेसाती, ढैया या शनि की महादशा में इसे 23,000 बार जपने की परंपरा है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; काला, गहरा नीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और शनि देव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शनिवार को इसका विशेष महत्व है।
- ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 23,000 बार (लगभग 213 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
- जाप के बाद काले तिल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
शनि बीज मंत्र कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शनिवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
शनि बीज मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 23,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।
शनि बीज मंत्र का अर्थ क्या है?
प्रां, प्रीं, प्रौं शनि के बीज अक्षर हैं; इनके साथ शनि देव को नमस्कार।
