शनि नवग्रह मंत्र (पौराणिक)
शनि देव · शनिवार
नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् ।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥
nilanjanasamabhasam raviputram yamagrajam |
chhayamartandasambhutam tam namami shanaishcharam ||
अर्थ
नीले काजल जैसी आभा वाले, सूर्य के पुत्र, यमराज के बड़े भाई, छाया और सूर्य से उत्पन्न शनैश्चर को मैं नमस्कार करता हूँ।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
शनि शांति के लिए यह सबसे प्रचलित श्लोक है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; काला, गहरा नीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और शनि देव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शनिवार को इसका विशेष महत्व है।
- ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 23,000 बार (लगभग 213 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
- जाप के बाद काले तिल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
शनि नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शनिवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
शनि नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 23,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।
शनि नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?
नीले काजल जैसी आभा वाले, सूर्य के पुत्र, यमराज के बड़े भाई, छाया और सूर्य से उत्पन्न शनैश्चर को मैं नमस्कार करता हूँ।
