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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:51 PMIST
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शनि गायत्री मंत्र

शनि देव · शनिवार

ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि ।
तन्नो मन्दः प्रचोदयात् ॥

Om kakadhvajaya vidmahe khadgahastaya dhimahi |
tanno mandah prachodayat ||

अर्थ

हम कौए की ध्वजा वाले शनि देव को जानें, हाथ में खड्ग लिए का ध्यान करें; वे मंद गति वाले शनि देव हमें प्रेरित करें।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

शनिवार को इसका जाप शनि की पीड़ा कम करने वाला माना जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; काला, गहरा नीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और शनि देव का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शनिवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 23,000 बार (लगभग 213 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
  6. जाप के बाद काले तिल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

शनि गायत्री मंत्र कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शनिवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

शनि गायत्री मंत्र कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 23,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।

शनि गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है?

हम कौए की ध्वजा वाले शनि देव को जानें, हाथ में खड्ग लिए का ध्यान करें; वे मंद गति वाले शनि देव हमें प्रेरित करें।

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