शुक्र मूल मंत्र
शुक्र देव · शुक्रवार
ॐ शुं शुक्राय नमः ।
Om shum shukraya namah |
अर्थ
"शुं" शुक्र का बीज अक्षर है; शुक्र देव को नमस्कार।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
शुक्रवार को सफ़ेद फूल चढ़ाकर इसका जाप किया जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; सफ़ेद, हल्का गुलाबी रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और शुक्र देव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शुक्रवार को इसका विशेष महत्व है।
- ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 16,000 बार (लगभग 149 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
- जाप के बाद चावल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
शुक्र मूल मंत्र कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शुक्रवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
शुक्र मूल मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 16,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।
शुक्र मूल मंत्र का अर्थ क्या है?
"शुं" शुक्र का बीज अक्षर है; शुक्र देव को नमस्कार।
