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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:48 PMIST
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शुक्र नवग्रह मंत्र (पौराणिक)

शुक्र देव · शुक्रवार

हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् ।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् ॥

himakundamrinalabham daityanam paramam gurum |
sarvashastrapravaktaram bhargavam pranamamyaham ||

अर्थ

बर्फ़, कुंद के फूल और कमल-नाल जैसे उजले, दैत्यों के परम गुरु, सब शास्त्रों के ज्ञाता, भृगु वंशी शुक्राचार्य को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

नवग्रह शांति के पाठ में शुक्र के लिए यही श्लोक पढ़ा जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; सफ़ेद, हल्का गुलाबी रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और शुक्र देव का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शुक्रवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 16,000 बार (लगभग 149 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
  6. जाप के बाद चावल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

शुक्र नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शुक्रवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

शुक्र नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 16,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।

शुक्र नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?

बर्फ़, कुंद के फूल और कमल-नाल जैसे उजले, दैत्यों के परम गुरु, सब शास्त्रों के ज्ञाता, भृगु वंशी शुक्राचार्य को मैं प्रणाम करता हूँ।

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