सूर्य अर्घ्य मंत्र
सूर्य देव · रविवार
ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते ।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर ॥
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर ॥
Om ehi surya sahasransho tejorashe jagatpate |
anukampaya mam bhaktya grihanarghyam divakara ||
अर्थ
हे हज़ारों किरणों वाले, तेज के भंडार, जगत के स्वामी सूर्य देव! मुझ पर कृपा करें और भक्ति से दिया यह अर्घ्य स्वीकार करें।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
सुबह ताँबे के लोटे से जल चढ़ाते समय यह मंत्र बोला जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; लाल, केसरिया रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और सूर्य देव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; रविवार को इसका विशेष महत्व है।
- ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 7,000 बार (लगभग 65 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
- जाप के बाद गेहूँ जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
सूर्य अर्घ्य मंत्र कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से रविवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
सूर्य अर्घ्य मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 7,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।
सूर्य अर्घ्य मंत्र का अर्थ क्या है?
हे हज़ारों किरणों वाले, तेज के भंडार, जगत के स्वामी सूर्य देव! मुझ पर कृपा करें और भक्ति से दिया यह अर्घ्य स्वीकार करें।
