श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:25 PMIST
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हनुमान जी के 12 नाम (द्वादश नाम स्तोत्र)

हनुमान जी · मंत्र · आनंद रामायण में वर्णित (पारंपरिक)

मंत्र

हनुमान जी के 12 नाम (द्वादश नाम स्तोत्र)

हनुमान जी
रचना: आनंद रामायण में वर्णित (पारंपरिक)
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हनुमान जी के 12 नाम (द्वादश नाम स्तोत्र)
हनुमान जी के द्वादश (12) नाम

हनुमानञ्जनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबलः।
रामेष्टः फाल्गुनसखः पिङ्गाक्षोऽमितविक्रमः॥

उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशनः।
लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा॥

एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मनः।
स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च यः पठेत्॥

तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।
राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन॥

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हनुमान जी के द्वादश (12) नाम हनुमानञ्जनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबलः। रामेष्टः फाल्गुनसखः पिङ्गाक्षोऽमितविक्रमः॥

उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशनः।
लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा॥

एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मनः।
स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च यः पठेत्॥

तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।
राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन॥

बारह नाम और उनका अर्थ १. हनुमान: जिनकी ठुड्डी (हनु) वज्र लगने से टेढ़ी हुई। २. अञ्जनीसूनु: माता अंजनी के पुत्र। ३. वायुपुत्र: पवन देव के पुत्र। ४. महाबल: अपार बल वाले। ५. रामेष्ट: श्री राम के प्रिय। ६. फाल्गुनसख: अर्जुन (फाल्गुन) के सखा, जिनके रथ की ध्वजा पर हनुमान जी विराजे। ७. पिङ्गाक्ष: भूरी-सुनहरी आँखों वाले। ८. अमितविक्रम: असीम पराक्रम वाले। ९. उदधिक्रमण: समुद्र को लाँघने वाले। १०. सीताशोकविनाशन: माता सीता का शोक दूर करने वाले। ११. लक्ष्मणप्राणदाता: संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाले। १२. दशग्रीवदर्पहा: रावण का घमंड तोड़ने वाले।

पाठ का समय परंपरा में इन बारह नामों का पाठ सोते समय, सुबह उठने पर और यात्रा पर निकलते समय करने को कहा गया है।

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Hanuman Ji Ke Dvadash (12) Nam

hanumananjanisunurvayuputro mahabalah|
rameshtah phalgunasakhah pingaksho'mitavikramah||

udadhikramanashchaiva sitashokavinashanah|
lakshmanapranadata cha dashagrivasya darpaha||

evam dvadasha namani kapindrasya mahatmanah|
svapakale prabodhe cha yatrakale cha yah pathet||

tasya sarvabhayam nasti rane cha vijayi bhavet|
rajadvare gahvare cha bhayam nasti kadachana||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

हनुमान जी के बारह नामों का स्तोत्र, हर नाम के अर्थ के साथ।

महत्व

परंपरा के अनुसार सुबह, रात और यात्रा से पहले इसका पाठ भय दूर करता है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद हनुमान जी का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. मंगलवार और शनिवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।