परिचय
गोस्वामी तुलसीदास की रचना, जिसमें चालीस चौपाइयों में हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति का गुणगान है।
महत्व
मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष माना जाता है। भक्त इसे डर और संकट के समय मन को बल देने के लिए पढ़ते हैं।
हनुमान जी · चालीसा · गोस्वामी तुलसीदास
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥४॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
गोस्वामी तुलसीदास की रचना, जिसमें चालीस चौपाइयों में हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति का गुणगान है।
मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष माना जाता है। भक्त इसे डर और संकट के समय मन को बल देने के लिए पढ़ते हैं।