हनुमान जी के मंत्र
मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के दिन हैं। हनुमान जी संकटमोचन हैं और मान्यता है कि उनकी पूजा से शनि और मंगल के कष्ट भी कम होते हैं।
हनुमान मूल मंत्र
अर्थ: "हं" हनुमान जी का बीज अक्षर है; इसके साथ हनुमान जी को नमस्कार।
हनुमान गायत्री मंत्र
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ॥
अर्थ: हम अंजनी पुत्र को जानें, पवन पुत्र का ध्यान करें; वे हनुमान जी हमें प्रेरणा दें।
मनोजवं (हनुमान वंदना)
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
अर्थ: जो मन जैसे तेज़ और पवन जैसे वेगवान हैं, जिन्होंने इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, पवन के पुत्र, वानर सेना के प्रमुख, श्री राम के दूत, मैं उनकी शरण लेता हूँ।
अतुलितबलधामं (सुंदरकांड मंगलाचरण)
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥
अर्थ: अपार बल के धाम, सोने के पर्वत जैसे शरीर वाले, राक्षस रूपी वन के लिए अग्नि, ज्ञानियों में सबसे आगे, सब गुणों के भंडार, वानरों के स्वामी, श्री राम के प्रिय भक्त पवनपुत्र को मैं नमस्कार करता हूँ।
संकटमोचन मंत्र
अर्थ: रुद्र (शिव) स्वरूप हनुमान जी को नमस्कार; हुं फट् बाधा दूर करने वाले बीज शब्द हैं।
