॥ श्री गणेशाय नमः ॥
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दुर्गा अष्टमी

अगली बार: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 (2 दिन बाद)

नवरात्रि की अष्टमी को माँ महागौरी की पूजा और कन्या पूजन किया जाता है।

शुभ मुहूर्त: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

इस बार अष्टमी और नवमी एक ही दिन हैं: अष्टमी तिथि 10:52 AM पर ख़त्म होकर नवमी शुरू हो जाएगी। इसलिए अष्टमी की पूजा और कन्या पूजन सुबह जल्दी करें। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार दिन चुनें।

अष्टमी तिथि18 अक्टूबर, 8:28 AM से 10:52 AM
तिथि का आरंभ और समाप्ति
कन्या पूजन / अष्टमी पूजा6:24 AM से 10:52 AM
इसमें राहुकाल 7:49 AM से 9:15 AM छोड़ दें
सुबह से दोपहर तक, अष्टमी तिथि रहते
संधि पूजा10:28 AM से 11:16 AM
अष्टमी के अंतिम 24 और नवमी के पहले 24 मिनट
अभिजीत मुहूर्त11:43 AM से 12:28 PM
दिन का सबसे शुभ समय

इस समय पूजा शुरू न करें

राहुकाल7:49 AM से 9:15 AM
यमगंड10:40 AM से 12:06 PM

सूर्योदय 6:24 AM, सूर्यास्त 5:47 PM। समय दिल्ली के अनुसार है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें। स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

अष्टमी पूजा और कन्या पूजन की विधि

  1. सुबह स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
  2. कलश और माँ की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएँ। अष्टमी के दिन माँ महागौरी का ध्यान करें।
  3. माँ को लाल चुनरी, सुहाग की सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर), रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
  4. हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाएँ और नारियल चढ़ाएँ।
  5. दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी कवच का पाठ करें।
  6. कन्या पूजन: 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं और एक बालक (भैरव/लांगुर रूप) को आदर से बुलाएँ। उनके पैर धोकर आसन पर बैठाएँ, तिलक लगाएँ और कलावा बाँधें।
  7. कन्याओं को हलवा-पूरी-चने का भोजन कराएँ, फिर दक्षिणा या उपहार देकर पैर छूकर आशीर्वाद लें और विदा करें।
  8. जिन घरों में संधि पूजा की परंपरा है, वे अष्टमी-नवमी के संधि काल में माँ चामुंडा की पूजा, 108 दीपक और 108 कमल के फूल अर्पित करते हैं।
  9. अंत में आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

पूजा सामग्री

  • लाल चुनरी
  • सुहाग सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर)
  • रोली, अक्षत, कलावा
  • लाल फूल
  • नारियल
  • हलवा, पूरी, काले चने
  • घी, दीपक, धूप
  • कन्याओं के लिए दक्षिणा / उपहार
  • आसन और पानी का लोटा (पैर धोने के लिए)

क्या न करें

  • राहुकाल में पूजा या कन्या पूजन शुरू न करें।
  • व्रत रखने वाले प्याज़, लहसुन और तामसिक भोजन से दूर रहें।
  • कन्या पूजन में कन्याओं को ज़बरदस्ती खाना न खिलाएँ; जितना वे चाहें उतना ही दें।
  • कई परिवार कन्या पूजन नवमी को करते हैं; अपने घर की परंपरा मानें।

यह सामान्य पूजा विधि है। अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।