परिचय
सोलह सोमवार के व्रत की कथा, विधि और उद्यापन, सरल हिंदी में।
महत्व
परंपरा में इसे मनोकामना पूर्ति और भगवान शिव की कृपा का व्रत माना जाता है।

भगवान शिव · व्रत कथा · पारंपरिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
एक बार भगवान शिव और माता पार्वती घूमते हुए अमरावती नगरी के एक शिव मंदिर में पहुँचे और वहाँ चौपड़ खेलने लगे। मंदिर के पुजारी से पूछा गया कि कौन जीतेगा, तो उसने बिना सोचे भगवान शिव का नाम ले दिया।
खेल में माता पार्वती जीतीं। झूठ बोलने के कारण माता ने पुजारी को कोढ़ होने का शाप दे दिया।
कुछ समय बाद स्वर्ग की अप्सराएँ उस मंदिर में आईं और पुजारी को सोलह सोमवार के व्रत की विधि बताई। पुजारी ने श्रद्धा से सोलह सोमवार का व्रत किया और वह रोग से मुक्त हो गया।
खेल में माता पार्वती जीतीं। झूठ बोलने के कारण माता ने पुजारी को कोढ़ होने का शाप दे दिया।
कुछ समय बाद स्वर्ग की अप्सराएँ उस मंदिर में आईं और पुजारी को सोलह सोमवार के व्रत की विधि बताई। पुजारी ने श्रद्धा से सोलह सोमवार का व्रत किया और वह रोग से मुक्त हो गया।
बाद में माता पार्वती ने भी अपने रूठे पुत्र कार्तिकेय से मिलने के लिए यही व्रत किया, और कार्तिकेय जी स्वयं उनसे मिलने आ गए। इसी तरह कई भक्तों की मनोकामनाएँ इस व्रत से पूरी हुईं।
परंपरा में अविवाहित कन्याएँ मनचाहे वर के लिए और परिवार की सुख-शांति के लिए यह व्रत रखती हैं।
सोलह सोमवार के व्रत की कथा, विधि और उद्यापन, सरल हिंदी में।
परंपरा में इसे मनोकामना पूर्ति और भगवान शिव की कृपा का व्रत माना जाता है।