तुलसी विवाह
अगली बार: शनिवार, 21 नवंबर 2026 (20 दिन बाद)
Tulsi Vivah 2026 kab hai? 21 November 2026, Saturday (Shanivar).
देवउठनी एकादशी के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल द्वादशी को माँ तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु) से कराया जाता है। कई परिवार यह विवाह एकादशी की शाम को ही करते हैं। इसी के साथ विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू होते हैं।
शुभ मुहूर्त: शनिवार, 21 नवंबर 2026
| द्वादशी तिथि | 6:32 AM से 22 नवंबर, 4:57 AM तिथि का आरंभ और समाप्ति |
|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त | 11:45 AM से 12:28 PM दिन का सबसे शुभ समय |
इस समय पूजा शुरू न करें
| राहुकाल | 9:27 AM से 10:47 AM |
|---|---|
| यमगंड | 1:26 PM से 2:46 PM |
सूर्योदय 6:48 AM, सूर्यास्त 5:25 PM। समय दिल्ली के अनुसार है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें। स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
तुलसी विवाह के वॉलपेपर और शुभकामना कार्ड
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तुलसी विवाह के मंत्र
भगवान विष्णु
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥
श्री कृष्ण
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥
तुलसी विवाह की विधि
- शाम को आँगन या पूजा स्थान पर तुलसी के गमले को साफ़ करके गेरू या रंगोली से सजाएँ और गन्ने का छोटा मंडप बनाएँ।
- माँ तुलसी को लाल चुनरी ओढ़ाएँ, चूड़ी, बिंदी और सिंदूर जैसी सुहाग की चीज़ें अर्पित करें।
- तुलसी के पास शालिग्राम जी या भगवान विष्णु की प्रतिमा रखें और दोनों को हल्दी, चंदन और फूल चढ़ाएँ।
- परिवार के सदस्य कन्यादान की भावना से तुलसी जी का विवाह कराते हैं; शालिग्राम जी को तुलसी के चारों ओर सात फेरे कराए जाते हैं।
- विवाह के बाद आरती करें, भोग लगाएँ और प्रसाद बाँटें।
पूजा सामग्री
- तुलसी का पौधा
- शालिग्राम या विष्णु प्रतिमा
- गन्ने (मंडप के लिए)
- लाल चुनरी
- सुहाग सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर)
- हल्दी, चंदन, रोली
- फूल और माला
- फल, मिठाई
- दीपक, घी, धूप
सवाल-जवाब
तुलसी विवाह 2026 कब है?
तुलसी विवाह 2026 में 21 नवंबर 2026, शनिवार को है।
Tulsi Vivah 2026 kab hai?
Tulsi Vivah 2026: 21 November 2026, Saturday (Shanivar).
तुलसी विवाह कब करें, एकादशी को या द्वादशी को?
दोनों परंपराएँ हैं। कई परिवार देवउठनी एकादशी की शाम को ही तुलसी विवाह करते हैं, और कई अगले दिन कार्तिक शुक्ल द्वादशी को। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार किसी भी दिन कर सकते हैं।
यह सामान्य पूजा विधि है। अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।

