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अजा एकादशी व्रत कथा

अगली अजा एकादशी: 28 अगस्त 2027 (शनिवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 29 अगस्त को 5:57 AM से 8:31 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

अजा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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अजा एकादशी व्रत कथा
अजा एकादशी व्रत कथा

सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने वचन निभाने के लिए अपना राज्य दान कर दिया था। कठिन परीक्षा में उन्हें पत्नी और पुत्र से अलग होकर श्मशान में चांडाल के यहाँ काम करना पड़ा।

इतने कष्ट में भी उन्होंने सत्य नहीं छोड़ा। एक दिन दुखी राजा के पास गौतम ऋषि आए।

ऋषि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण एकादशी, यानी अजा एकादशी का व्रत करने को कहा। राजा ने श्रद्धा से व्रत और जागरण किया।

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अजा एकादशी व्रत कथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने वचन निभाने के लिए अपना राज्य दान कर दिया था। कठिन परीक्षा में उन्हें पत्नी और पुत्र से अलग होकर श्मशान में चांडाल के यहाँ काम करना पड़ा।

इतने कष्ट में भी उन्होंने सत्य नहीं छोड़ा। एक दिन दुखी राजा के पास गौतम ऋषि आए।

ऋषि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण एकादशी, यानी अजा एकादशी का व्रत करने को कहा। राजा ने श्रद्धा से व्रत और जागरण किया।

व्रत के प्रभाव से उनके कष्ट दूर हुए, मृत पुत्र जीवित हो गया, और परिवार तथा राज्य फिर से मिल गए।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी, अजा एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

अजा एकादशी कब है?

28 अगस्त 2027 (शनिवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 29 अगस्त को 5:57 AM से 8:31 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।