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पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

अगली पौष पुत्रदा एकादशी: 19 जनवरी 2027 (मंगलवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 20 जनवरी को 7:14 AM से 9:21 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी शैब्या के कोई संतान नहीं थी, जिससे वे बहुत दुखी रहते थे।

एक दिन वन में घूमते हुए राजा एक सरोवर के किनारे मुनियों के आश्रम पहुँचे। मुनियों ने बताया कि आज पौष शुक्ल एकादशी है, जिसे पुत्रदा एकादशी कहते हैं।

मुनियों की सलाह पर राजा ने उसी दिन विधि से व्रत किया और द्वादशी को पारण किया। कुछ समय बाद रानी को तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ।

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पौष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी शैब्या के कोई संतान नहीं थी, जिससे वे बहुत दुखी रहते थे।

एक दिन वन में घूमते हुए राजा एक सरोवर के किनारे मुनियों के आश्रम पहुँचे। मुनियों ने बताया कि आज पौष शुक्ल एकादशी है, जिसे पुत्रदा एकादशी कहते हैं।

मुनियों की सलाह पर राजा ने उसी दिन विधि से व्रत किया और द्वादशी को पारण किया। कुछ समय बाद रानी को तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ।

मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपती इस व्रत को श्रद्धा से करते हैं।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी, पौष पुत्रदा एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

पौष पुत्रदा एकादशी कब है?

19 जनवरी 2027 (मंगलवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 20 जनवरी को 7:14 AM से 9:21 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।