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सफला एकादशी व्रत कथा

अगली सफला एकादशी: 3 जनवरी 2027 (रविवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 4 जनवरी को 7:14 AM से 9:19 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

सफला एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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सफला एकादशी व्रत कथा
सफला एकादशी व्रत कथा

चंपावती नगरी के राजा महिष्मान का बड़ा पुत्र लुम्पक बुरी संगत और बुरे कामों में पड़ गया था। राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया।

लुम्पक जंगल में एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा। पौष कृष्ण दशमी की रात ठंड से वह बेहोश हो गया और अगले दिन, एकादशी को, भूखा-प्यासा पड़ा रहा।

शाम को उसने कुछ फल इकट्ठे किए, पर खा न सका और उन्हें पेड़ के पास भगवान के नाम पर रख दिया। रात भर वह जागता रहा। इस तरह अनजाने में ही उसका एकादशी व्रत और जागरण हो गया।

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सफला एकादशी व्रत कथा चंपावती नगरी के राजा महिष्मान का बड़ा पुत्र लुम्पक बुरी संगत और बुरे कामों में पड़ गया था। राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया।

लुम्पक जंगल में एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा। पौष कृष्ण दशमी की रात ठंड से वह बेहोश हो गया और अगले दिन, एकादशी को, भूखा-प्यासा पड़ा रहा।

शाम को उसने कुछ फल इकट्ठे किए, पर खा न सका और उन्हें पेड़ के पास भगवान के नाम पर रख दिया। रात भर वह जागता रहा। इस तरह अनजाने में ही उसका एकादशी व्रत और जागरण हो गया।

इस व्रत के प्रभाव से उसका मन बदल गया। उसने बुरे काम छोड़ दिए, पिता ने उसे वापस बुलाकर राज्य सौंप दिया। इसीलिए इसे सफला, यानी सफलता देने वाली एकादशी कहते हैं।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

पौष कृष्ण पक्ष की एकादशी, सफला एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

सफला एकादशी कब है?

3 जनवरी 2027 (रविवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 4 जनवरी को 7:14 AM से 9:19 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।