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षटतिला एकादशी व्रत कथा

अगली षटतिला एकादशी: 2 फ़रवरी 2027 (मंगलवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 3 फ़रवरी को 7:08 AM से 9:18 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

षटतिला एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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षटतिला एकादशी व्रत कथा
षटतिला एकादशी व्रत कथा

एक ब्राह्मणी बहुत धर्म-कर्म और व्रत करती थी, पर उसने कभी अन्न का दान नहीं किया था।

उसकी परीक्षा लेने भगवान भिक्षुक बनकर आए। ब्राह्मणी ने उन्हें भिक्षा में मिट्टी का एक ढेला दे दिया। मृत्यु के बाद उसे स्वर्ग में सुंदर घर तो मिला, पर वह अन्न और धन से खाली था।

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षटतिला एकादशी व्रत कथा एक ब्राह्मणी बहुत धर्म-कर्म और व्रत करती थी, पर उसने कभी अन्न का दान नहीं किया था।

उसकी परीक्षा लेने भगवान भिक्षुक बनकर आए। ब्राह्मणी ने उन्हें भिक्षा में मिट्टी का एक ढेला दे दिया। मृत्यु के बाद उसे स्वर्ग में सुंदर घर तो मिला, पर वह अन्न और धन से खाली था।

भगवान ने उसे बताया कि अन्नदान न करने से ऐसा हुआ। उन्होंने उसे माघ कृष्ण एकादशी को तिल का छह प्रकार से उपयोग करते हुए व्रत करने को कहा: तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिला जल, तिल का दान और तिल का भोजन।

उसने यह व्रत किया, और उसका घर अन्न-धन से भर गया। इसीलिए इस दिन तिल के दान का बड़ा महत्व माना जाता है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी, षटतिला एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

षटतिला एकादशी कब है?

2 फ़रवरी 2027 (मंगलवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 3 फ़रवरी को 7:08 AM से 9:18 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।