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देवशयनी एकादशी व्रत कथा

अगली देवशयनी एकादशी: 14 जुलाई 2027 (बुधवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 15 जुलाई को 5:33 AM से 8:18 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

देवशयनी एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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देवशयनी एकादशी व्रत कथा
देवशयनी एकादशी व्रत कथा

सूर्यवंशी राजा मांधाता के राज्य में तीन वर्ष तक वर्षा नहीं हुई और अकाल पड़ गया। दुखी प्रजा ने राजा से उपाय करने की विनती की।

राजा वन में अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुँचे। ऋषि ने उन्हें आषाढ़ शुक्ल एकादशी, यानी देवशयनी एकादशी का व्रत प्रजा सहित करने को कहा।

राजा और प्रजा ने विधि से व्रत किया, और राज्य में अच्छी वर्षा हुई, अन्न-धन से भंडार भर गए।

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देवशयनी एकादशी व्रत कथा सूर्यवंशी राजा मांधाता के राज्य में तीन वर्ष तक वर्षा नहीं हुई और अकाल पड़ गया। दुखी प्रजा ने राजा से उपाय करने की विनती की।

राजा वन में अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुँचे। ऋषि ने उन्हें आषाढ़ शुक्ल एकादशी, यानी देवशयनी एकादशी का व्रत प्रजा सहित करने को कहा।

राजा और प्रजा ने विधि से व्रत किया, और राज्य में अच्छी वर्षा हुई, अन्न-धन से भंडार भर गए।

मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इन चार महीनों को चातुर्मास कहते हैं, जिनमें विवाह जैसे शुभ काम नहीं किए जाते।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी, देवशयनी एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

देवशयनी एकादशी कब है?

14 जुलाई 2027 (बुधवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 15 जुलाई को 5:33 AM से 8:18 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।