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जया एकादशी व्रत कथा

अगली जया एकादशी: 17 फ़रवरी 2027 (बुधवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 18 फ़रवरी को 6:57 AM से 9:12 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

जया एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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जया एकादशी व्रत कथा
जया एकादशी व्रत कथा

इंद्र की सभा में माल्यवान नाम का गंधर्व और पुष्पवती नाम की अप्सरा गायन-नृत्य कर रहे थे। एक-दूसरे पर मोहित होने से उनका ध्यान भटक गया और सुर-ताल बिगड़ गए।

क्रोधित होकर इंद्र ने उन्हें पिशाच योनि में जन्म लेने का शाप दे दिया। दोनों हिमालय की कठोर ठंड में भटकते रहे।

माघ शुक्ल एकादशी को दुख के कारण उन्होंने कुछ भी नहीं खाया और ठंड से पूरी रात सो नहीं सके। इस तरह अनजाने में उनका व्रत और जागरण हो गया।

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जया एकादशी व्रत कथा इंद्र की सभा में माल्यवान नाम का गंधर्व और पुष्पवती नाम की अप्सरा गायन-नृत्य कर रहे थे। एक-दूसरे पर मोहित होने से उनका ध्यान भटक गया और सुर-ताल बिगड़ गए।

क्रोधित होकर इंद्र ने उन्हें पिशाच योनि में जन्म लेने का शाप दे दिया। दोनों हिमालय की कठोर ठंड में भटकते रहे।

माघ शुक्ल एकादशी को दुख के कारण उन्होंने कुछ भी नहीं खाया और ठंड से पूरी रात सो नहीं सके। इस तरह अनजाने में उनका व्रत और जागरण हो गया।

भगवान की कृपा से अगले दिन वे शाप से मुक्त होकर फिर स्वर्ग लौट गए। इसलिए इसे जया एकादशी कहते हैं।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जया एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

जया एकादशी कब है?

17 फ़रवरी 2027 (बुधवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 18 फ़रवरी को 6:57 AM से 9:12 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।