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कामदा एकादशी व्रत कथा

अगली कामदा एकादशी: 17 अप्रैल 2027 (शनिवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 18 अप्रैल को 5:52 AM से 7:42 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

कामदा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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कामदा एकादशी व्रत कथा
कामदा एकादशी व्रत कथा

भोगीपुर नगर में राजा पुंडरीक के दरबार में ललित नाम का गंधर्व गाता था। एक दिन गाते समय उसका मन अपनी पत्नी ललिता में लगा रहा और सुर बिगड़ गए।

राजा ने क्रोध में उसे राक्षस बनने का शाप दे दिया। ललिता अपने पति के साथ वन-वन भटकती रही।

विंध्याचल पर्वत पर श्रृंगी ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल एकादशी, यानी कामदा एकादशी का व्रत करने को कहा। ललिता ने व्रत करके उसका पुण्य अपने पति को अर्पित किया।

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कामदा एकादशी व्रत कथा भोगीपुर नगर में राजा पुंडरीक के दरबार में ललित नाम का गंधर्व गाता था। एक दिन गाते समय उसका मन अपनी पत्नी ललिता में लगा रहा और सुर बिगड़ गए।

राजा ने क्रोध में उसे राक्षस बनने का शाप दे दिया। ललिता अपने पति के साथ वन-वन भटकती रही।

विंध्याचल पर्वत पर श्रृंगी ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल एकादशी, यानी कामदा एकादशी का व्रत करने को कहा। ललिता ने व्रत करके उसका पुण्य अपने पति को अर्पित किया।

उस पुण्य से ललित राक्षस योनि से मुक्त होकर फिर गंधर्व बन गया। इसे मनोकामना पूरी करने वाली एकादशी माना जाता है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी, कामदा एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

कामदा एकादशी कब है?

17 अप्रैल 2027 (शनिवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 18 अप्रैल को 5:52 AM से 7:42 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।