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कामिका एकादशी व्रत कथा

अगली कामिका एकादशी: 29 जुलाई 2027 (गुरुवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 30 जुलाई को 1:48 PM से 4:31 PM के बीच। वैष्णव परंपरा में व्रत 30 जुलाई को। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

कामिका एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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कामिका एकादशी व्रत कथा
कामिका एकादशी व्रत कथा

एक गाँव में एक क्षत्रिय रहता था। एक दिन किसी बात पर विवाद में उसके हाथ से एक ब्राह्मण की मृत्यु हो गई।

पछतावे में उसने ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहा, पर समाज ने उसे ब्रह्महत्या के पाप के कारण अलग कर दिया।

एक ऋषि ने उसे बताया कि श्रावण कृष्ण एकादशी, यानी कामिका एकादशी को भगवान विष्णु की तुलसी से पूजा करके व्रत करने से बड़े से बड़ा पाप भी कट जाता है।

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कामिका एकादशी व्रत कथा एक गाँव में एक क्षत्रिय रहता था। एक दिन किसी बात पर विवाद में उसके हाथ से एक ब्राह्मण की मृत्यु हो गई।

पछतावे में उसने ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहा, पर समाज ने उसे ब्रह्महत्या के पाप के कारण अलग कर दिया।

एक ऋषि ने उसे बताया कि श्रावण कृष्ण एकादशी, यानी कामिका एकादशी को भगवान विष्णु की तुलसी से पूजा करके व्रत करने से बड़े से बड़ा पाप भी कट जाता है।

उसने श्रद्धा से व्रत किया और उसे पाप से मुक्ति मिली। इस दिन भगवान को तुलसी अर्पित करने का विशेष महत्व है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी, कामिका एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

कामिका एकादशी कब है?

29 जुलाई 2027 (गुरुवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 30 जुलाई को 1:48 PM से 4:31 PM के बीच। वैष्णव परंपरा में व्रत 30 जुलाई को।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।