श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:21 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
होम › व्रत कथा › परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

अगली परिवर्तिनी एकादशी: 11 सितंबर 2027 (शनिवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 12 सितंबर को 6:04 AM से 8:33 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
पन्ना पलटें →
परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा
परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

मान्यता है कि चातुर्मास में योगनिद्रा में सोए भगवान विष्णु भाद्रपद शुक्ल एकादशी को करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहते हैं।

इसकी कथा राजा बलि से जुड़ी है। दानवीर बलि ने अपने बल से तीनों लोक जीत लिए थे। तब भगवान विष्णु वामन रूप में उसके यज्ञ में पहुँचे और तीन पग भूमि माँगी।

बलि ने वचन दे दिया। वामन भगवान ने दो पग में धरती और आकाश नाप लिए, और तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया।

पन्ना 1–2 / 5
पूरा पाठ एक पेज पर पढ़ें

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा मान्यता है कि चातुर्मास में योगनिद्रा में सोए भगवान विष्णु भाद्रपद शुक्ल एकादशी को करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी या पार्श्व एकादशी कहते हैं।

इसकी कथा राजा बलि से जुड़ी है। दानवीर बलि ने अपने बल से तीनों लोक जीत लिए थे। तब भगवान विष्णु वामन रूप में उसके यज्ञ में पहुँचे और तीन पग भूमि माँगी।

बलि ने वचन दे दिया। वामन भगवान ने दो पग में धरती और आकाश नाप लिए, और तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया।

बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे पाताल का राजा बनाया और उसके साथ रहने का वचन दिया। इस दिन वामन भगवान की पूजा की जाती है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

परिवर्तिनी एकादशी कब है?

11 सितंबर 2027 (शनिवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 12 सितंबर को 6:04 AM से 8:33 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।