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रमा एकादशी व्रत कथा

अगली रमा एकादशी: 5 नवंबर 2026 (गुरुवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 6 नवंबर को 6:36 AM से 8:47 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

रमा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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रमा एकादशी व्रत कथा
रमा एकादशी व्रत कथा

राजा मुचुकुंद की पुत्री चंद्रभागा का विवाह राजकुमार शोभन से हुआ था। राजा के राज्य में सब एकादशी का व्रत करते थे।

एक बार शोभन ससुराल आए हुए थे, तभी कार्तिक कृष्ण एकादशी आ गई। शरीर से कमज़ोर होने पर भी शोभन ने व्रत रखा, पर भूख-प्यास से उनकी मृत्यु हो गई।

व्रत के पुण्य से उन्हें मंदराचल पर्वत पर एक सुंदर राज्य मिला, पर वह स्थिर नहीं था। चंद्रभागा को जब यह पता चला, तो उसने अपनी बचपन से की गई एकादशियों का पुण्य पति को अर्पित किया।

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रमा एकादशी व्रत कथा राजा मुचुकुंद की पुत्री चंद्रभागा का विवाह राजकुमार शोभन से हुआ था। राजा के राज्य में सब एकादशी का व्रत करते थे।

एक बार शोभन ससुराल आए हुए थे, तभी कार्तिक कृष्ण एकादशी आ गई। शरीर से कमज़ोर होने पर भी शोभन ने व्रत रखा, पर भूख-प्यास से उनकी मृत्यु हो गई।

व्रत के पुण्य से उन्हें मंदराचल पर्वत पर एक सुंदर राज्य मिला, पर वह स्थिर नहीं था। चंद्रभागा को जब यह पता चला, तो उसने अपनी बचपन से की गई एकादशियों का पुण्य पति को अर्पित किया।

इससे वह राज्य स्थिर हो गया और दोनों सुख से रहने लगे। यह एकादशी दिवाली से कुछ दिन पहले आती है और इसमें माँ लक्ष्मी (रमा) की भी पूजा होती है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी, रमा एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

रमा एकादशी कब है?

5 नवंबर 2026 (गुरुवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 6 नवंबर को 6:36 AM से 8:47 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।